New UPI Payment Rules: किसके खाते से कटेगा पैसा?
New UPI Payment Rules: क्या ऑनलाइन पैसे भेजने पर लगेगा चार्ज? जानिए ₹2000 और MDR की पूरी हकीकत

New UPI rules और UPI transaction charges को लेकर हर किसी के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या अब ऑनलाइन पेमेंट करने पर जेब कटेगी। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने एक स्पष्टीकरण जारी कर यह साफ किया है कि यह नियम सिर्फ किसी एक बैंक का नहीं, बल्कि नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के दिशानिर्देशों पर आधारित है जो SBI, HDFC, ICICI, PNB समेत सभी बैंकों के खाताधारकों पर लागू होते हैं।
सीधे तौर पर समझें कि इस नए फैसले का आपके लेन-देन पर क्या असर पड़ेगा:
- आम जनता का लेन-देन: किसी भी व्यक्ति को पैसे ट्रांसफर करने पर एक भी रुपया अतिरिक्त नहीं कटता।
- दुकानों पर खरीदारी: चाय-नाश्ते से लेकर महीने के राशन तक के रोजमर्रा के पेमेंट ग्राहकों के लिए पूरी तरह फ्री हैं।
- सिर्फ बड़े मर्चेंट पर पेच: चार्ज का दायरा सिर्फ खास बड़े व्यापारियों के चुनिंदा ट्रांजैक्शन तक सीमित रखा गया है।
UPI Transfer Charges: क्या दोस्त या रिश्तेदार को ₹1 लाख भेजने पर पैसे कटेंगे?
गूगल पर लोग अक्सर सर्च करते हैं— charges for sending 1 lakh via UPI या UPI money transfer fees। अगर आप PhonePe, Google Pay या Paytm से अपने किसी भाई, दोस्त या रिश्तेदार को ₹500 भेज रहे हैं या सीधे ₹1 लाख, तो इसके नियम बिल्कुल साफ हैं:
- शून्य ट्रांसफर शुल्क: Person-to-Person (P2P) ट्रांसफर पर कोई बैंक या ऐप शुल्क नहीं लेता। ₹1 लाख भेजने पर पूरे ₹1 लाख ही सामने वाले के खाते में पहुंचेंगे।
- दैनिक सीमा का नियम: कोई चार्ज नहीं कटता, लेकिन सुरक्षा कारणों से ज्यादातर बैंकों में 24 घंटे के अंदर यूपीआई से अधिकतम ₹1 लाख भेजने की ही तय सीमा होती है।
- एमडीआर से पूरी छूट: रिश्तेदार या परिचितों के निजी खातों में भेजे जाने वाले पैसों पर किसी भी तरह का टैक्स या सर्विस चार्ज लागू नहीं होता।
What is MDR Charge: 96% मर्चेंट पेमेंट फ्री होने का असली मतलब क्या है?

MDR यानी Merchant Discount Rate वह तकनीकी फीस है, जो डिजिटल पेमेंट नेटवर्क इस्तेमाल करने के एवज में बैंक व्यापारियों से लेते हैं। आम ग्राहक से इसका कोई लेना-देना नहीं होता।
96% फ्री पेमेंट के पीछे का पूरा मामला इस तरह है:
- छोटे रोजमर्रा के खर्च: देश में 100 में से 96 डिजिटल भुगतान ₹2000 से कम के होते हैं। फल-सब्जी, दवा, पेट्रोल या राशन के इन सभी छोटे भुगतानों पर बैंक कोई MDR नहीं लेते।
- बाकी 4% बड़े ट्रांजैक्शन: केवल 4 प्रतिशत पेमेंट ही ₹2000 से ऊपर के दायरे में आते हैं। इनमें भी जरूरी व सरकारी सेवाओं में ₹2000 से ज्यादा के बिल पर सिर्फ ₹5 का फ्लैट MDR तय है, जो मर्चेंट खाते से जुड़ा होता है।
- MRP का कड़ा कानून: किसी भी सामान के अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) पर पेमेंट का तरीका बदलने से दाम नहीं बदलता। आप नकद दें या यूपीआई स्कैन करें, दुकानदार तय प्रिंट रेट से ज्यादा नहीं मांग सकता।
छोटे व्यापारियों (P2PM) को छूट और इस व्यवस्था के नफे-नुकसान
ठेले, गुमटी और गली-मोहल्ले की दुकानों पर लगे P2PM क्यूआर कोड के लिए सबसे बड़ी राहत यह है कि महीने में ₹1 लाख तक की ऑनलाइन बिक्री पर उनसे ₹0 MDR लिया जाएगा।
फायदे (Pros)
- ग्राहकों की बचत: बैंक से बैंक में सीधा पैसा भेजना पहले की तरह पूरी तरह फ्री बना हुआ है।
- पारदर्शी व्यवस्था: मनमाने चार्जेस पर रोक लगेगी और सभी बैंकों के खाताधारकों के लिए नियम एक समान रहेंगे।
- छोटे कारोबार को बढ़ावा: ₹1 लाख प्रति माह तक की आमदनी वाले छोटे दुकानदारों का डिजिटल पेमेंट बिना किसी कटौती के उनके खाते में आएगा।
नुकसान (Cons)
- दुकानदारों में असमंजस: नियमों की सही जानकारी न होने की वजह से कई छोटे व्यापारी ₹2000 से ऊपर के पेमेंट पर ग्राहकों से नकद मांगने का दबाव बनाने लगते हैं।
- बिलिंग में खींचतान: कुछ शोरूम और इलेक्ट्रॉनिक्स कारोबारी अनौपचारिक रूप से मर्चेंट चार्ज का बोझ ग्राहक पर डालने की कोशिश करते हैं।
Wah Times News की राय: घबराहट छोड़ें, अफवाहों से दूर रहें

जब भी बैंकिंग सिस्टम में कोई नया सर्कुलर जारी होता है, तो बाजार में तुरंत यह हल्ला मच जाता है कि मोबाइल से पैसा भेजने पर जेब कटने लगेगी। सच यह है कि यह नया ढांचा बैंकों और बड़े पेमेंट गेटवे के बीच के सिस्टम को दुरुस्त करने के लिए बना है। आम यूजर, छात्र और सामान्य नौकरीपेशा लोगों के लिए यूपीआई पहले की तरह ही सुरक्षित और बिल्कुल मुफ्त है। इसलिए किसी भी मनगढ़ंत चर्चा में न आएं, बेझिझक ऑनलाइन पेमेंट करें और डिजिटल सहूलियत का लाभ उठाएं।
आपके मन की कुछ ऐसे सवाल (FAQs)
सवाल 1: क्या एक ही दिन में कई बार ₹2000 से कम भेजने पर कुल जोड़ देखकर चार्ज लगेगा? जवाब: नहीं। नियम हर एक लेन-देन (Per Transaction) पर अलग-अलग लागू होता है, दिन भर के कुल जोड़ पर नहीं। आप दिन भर में कई बार छोटे-छोटे भुगतान बिना किसी MDR के कर सकते हैं।
सवाल 2: अगर कोई दुकानदार ऑनलाइन पेमेंट लेने के लिए अलग से ₹5 या ₹10 मांगे तो क्या करें? जवाब: नियमों के मुताबिक कोई भी मर्चेंट ग्राहक से एमडीआर या अतिरिक्त फीस नकद में नहीं वसूल सकता। ऐसा होने पर आप बैंक के ऑनलाइन पोर्टल या नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन पर सीधे शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
सवाल 3: क्या क्रेडिट कार्ड या वॉलेट से यूपीआई पेमेंट करने पर भी यही नियम लागू होता है? जवाब: नहीं। यह नियम सामान्य बैंक खातों के बीच होने वाले यूपीआई लेन-देन के लिए है। RuPay क्रेडिट कार्ड या प्रीपेड वॉलेट से बड़े मर्चेंट को किए जाने वाले पेमेंट के लिए NPCI के अलग इंटरचेंज नियम लागू होते हैं।
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अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। बैंकिंग नियमों और शुल्कों में समय-समय पर बदलाव संभव हैं। किसी भी वित्तीय लेन-देन से पहले अपने बैंक या NPCI के आधिकारिक दिशा-निर्देश अवश्य जांचें।