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Dark Web and Digital Footprint: डेटा चोरी का सबसे बड़ा खतरा!

Dark Web and Digital Footprint: इंटरनेट की दुनिया में आपका Personal Data कैसे बिकता है?

Person using smartphone in dimly lit room generating active digital footprint through social media use

​हम जब भी गीली मिट्टी या रेत पर चलते हैं, तो पीछे हमारे पैरों के निशान छूट जाते हैं। ठीक वैसे ही, जब हम मोबाइल या कंप्यूटर पर इंटरनेट चलाते हैं, तो हमारा एक डिजिटल निशान छूटता जाता है। इसी निशान को टेक की भाषा में Digital Footprint कहते हैं।

​चाहे आप यूट्यूब पर कोई वीडियो देखें, गूगल पर कुछ सर्च करें, किसी शॉपिंग ऐप पर जूते देखें या सोशल मीडिया पर फोटो पोस्ट करें—हर जगह आपका कुछ न कुछ डेटा दर्ज हो रहा है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह डेटा सिर्फ कंपनियों के पास रहता है या फिर यह इंटरनेट के चोर बाजार यानी Dark Web तक भी पहुंच जाता है?

​Digital Footprint क्या है और यह कैसे बनता है?

​सरल शब्दों में, इंटरनेट पर आपके द्वारा किया गया कोई भी काम पीछे एक रिकॉर्ड छोड़ जाता है। यह मुख्य रूप से दो तरीकों से बनता है:

  • खुद से दिया गया डेटा (Active Footprint): जब आप किसी ऐप में अपना नाम, ईमेल, मोबाइल नंबर, फोटो या जन्मतिथि खुद डालते हैं। जैसे फेसबुक पर पोस्ट डालना या किसी ऑनलाइन फॉर्म को भरना।
  • चुपके से दर्ज होने वाला डेटा (Passive Footprint): जब आपको पता भी नहीं चलता और सिस्टम आपकी जानकारी नोट कर लेता है। उदाहरण के लिए, आप किस शहर से इंटरनेट चला रहे हैं, आपका IP Address क्या है, आप किस मोबाइल मॉडल का उपयोग कर रहे हैं और किसी वेबसाइट पर आपने कितनी देर समय बिताया।

​Surface Web, Deep Web और Dark Web को आसान भाषा में समझें

​इंटरनेट को अगर एक बहुत बड़ा समंदर मान लें, तो यह तीन हिस्सों में बंटा हुआ है:

  • Surface Web (ऊपरी सतह): यह इंटरनेट का वह खुला हिस्सा है जिसे हम और आप रोज गूगल, यूट्यूब या विकिपीडिया पर सर्च करके खोलते हैं। यह पूरे इंटरनेट का सिर्फ 4 से 5 प्रतिशत ही है।
  • Deep Web (निजी लॉकर): इसमें वह डेटा होता है जिसे हर कोई सीधे सर्च करके नहीं देख सकता। इसे खोलने के लिए पासवर्ड की जरूरत होती है। जैसे आपका बैंक अकाउंट लॉगिन, आपकी पर्सनल ईमेल आईडी, गूगल ड्राइव या कॉलेज का रिजल्ट पोर्टल।
  • Dark Web (इंटरनेट का चोर बाजार): यह इंटरनेट की सबसे निचली और छिपी हुई दुनिया है। इसे आम गूगल क्रोम या फोन के ब्राउज़र से नहीं खोला जा सकता। इसके लिए Tor जैसे खास सॉफ्टवेयर की जरूरत पड़ती है। यहां हैकर्स, साइबर अपराधी और फ्रॉड करने वाले लोग चुराया हुआ डेटा खरीदते और बेचते हैं।

​आपका Personal Data हैकर्स तक और फिर Dark Web पर कैसे पहुंचता है?

Laptop screen showing data breach alert with unlocked padlock icon representing cyber attack risk

​हम में से ज्यादातर लोग सोचते हैं कि “मैं तो कोई वीआईपी नहीं हूं, मेरा डेटा लेकर कोई क्या करेगा?” लेकिन हैकर्स के लिए आम आदमी का डेटा भी बहुत कीमती होता है।

​जब आप किसी अनजान ऐप या वेबसाइट पर अपना मोबाइल नंबर, पासवर्ड या आधार कार्ड डालते हैं, और बाद में वह कंपनी हैक हो जाती है, तो उसे Data Breach कहा जाता है। हैकर्स उस पूरी कंपनी के लाखों यूजर्स का डेटा चुरा लेते हैं और उसे Dark Web पर बेच देते हैं।

​वहां आपका क्या-क्या डेटा बिकता है:

  • ​आपके ईमेल और उनके पुराने या नए पासवर्ड।
  • ​आपका मोबाइल नंबर और घर का पता।
  • ​आधार कार्ड, पैन कार्ड या ड्राइविंग लाइसेंस की फोटो कॉपी।
  • ​क्रेडिट या डेबिट कार्ड की डिटेल्स।

​इस डेटा को खरीदकर साइबर ठग लोगों को फर्जी कॉल करते हैं, बैंक के नाम पर ओटीपी मांगते हैं, या आपके नाम पर फर्जी सिम कार्ड निकालकर फ्रॉड करते हैं।

​Digital Footprint के फायदे और नुकसान (Pros and Cons)

​इंटरनेट का इस्तेमाल करना हमारी मजबूरी भी है और जरूरत भी, इसलिए इसके दोनों पहलू समझना जरूरी है:

​फायदे (Pros)

  • मनपसंद चीजें जल्दी मिलना: आपके सर्च रिकॉर्ड के आधार पर ऐप्स आपको वही चीजें दिखाते हैं जो आपको पसंद हैं, जिससे समय बचता है।
  • ऑनलाइन काम आसान होना: डिजिटल पहचान की वजह से घर बैठे 5 मिनट में बैंक खाता खुल जाता है या लोन का काम हो जाता है।
  • सुरक्षा अलर्ट: अगर कोई अनजान व्यक्ति आपकी ईमेल आईडी लॉगिन करने की कोशिश करेगा, तो गूगल तुरंत आपके फोन पर चेतावनी भेज देता है।

​नुकसान (Cons)

  • फ्रॉड और फर्जीवाड़े का खतरा: अगर आपका डेटा लीक हो गया, तो कोई आपके नाम और नंबर का गलत इस्तेमाल करके दूसरों को ठग सकता है।
  • डेटा हमेशा के लिए दर्ज होना: इंटरनेट पर एक बार जो जानकारी चली गई, उसे पूरी तरह से मिटाना लगभग नामुमकिन होता है।
  • टारगेटेड फ्रॉड कॉल्स: ठगों को पहले से पता होता है कि आपका नाम क्या है और आप कौन सा बैंक इस्तेमाल करते हैं, जिससे उनके झांसे में आना आसान हो जाता है।

​Wah Times News की राय। 

Holding smartphone displaying secure two step verification icon and safe app environment with high data privacy standards

​इंटरनेट चलाते समय हमेशा थोड़ी सावधानी बरतना ही सबसे बड़ी समझदारी है। हर छोटे-मोटे गेम या ऐप को अपने फोन के कॉन्टैक्ट्स, गैलरी और लोकेशन की परमिशन कभी न दें। अगर कोई ऐप सिर्फ फोटो एडिट करने का है, तो उसे आपके फोन कॉल या मैसेज देखने की कोई जरूरत नहीं होनी चाहिए।

​इसके अलावा, अपने सभी मुख्य अकाउंट्स (जैसे गूगल और व्हाट्सएप) पर Two-Factor Authentication (2FA) चालू रखें। हर जगह एक ही पासवर्ड रखने की गलती कभी न करें, और अनजान लिंक या मैसेज से मिलने वाली फाइल्स को डाउनलोड करने से बचें।

​अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. Data Brokers क्या होते हैं और यह Dark Web से कैसे अलग हैं?

Data Brokers वे कानूनी कंपनियां होती हैं जो अलग-अलग ऐप्स और वेबसाइट्स से आपका पब्लिक डेटा (जैसे आपकी पसंद, उम्र और ऑनलाइन शॉपिंग की आदतें) इकट्ठा करती हैं और विज्ञापनों के लिए दूसरी कंपनियों को बेचती हैं। Dark Web पर गैर-कानूनी तरीके से चुराया गया और हैक किया गया प्राइवेट डेटा बिकता है, जबकि डेटा ब्रोकर्स नियमों के दायरे में रहकर बिजनेस करते हैं।

2. क्या फोन में Incognito Mode (प्राइवेट ब्राउज़िंग) चलाने से हमारी जानकारी पूरी तरह छिप जाती है?

नहीं। इनकॉग्निटो मोड सिर्फ आपके अपने फोन में हिस्ट्री और पासवर्ड सेव होने से रोकता है ताकि आपके फोन को चलाने वाला दूसरा इंसान यह न देख सके कि आपने क्या देखा। लेकिन आप जिस सिम या वाई-फाई से इंटरनेट चला रहे हैं, उस कंपनी (ISP) और उस वेबसाइट के पास आपका डेटा और आईपी एड्रेस फिर भी पहुंचता है।

3. अगर कभी पता चले कि हमारा आधार या पैन कार्ड का डेटा लीक हो गया है, तो तुरंत क्या करना चाहिए?

घबराने के बजाय सबसे पहले UIDAI की आधिकारिक वेबसाइट या mAadhaar ऐप पर जाकर अपने आधार बायोमेट्रिक्स को ‘Lock’ कर दें। ऐसा करने के बाद कोई भी आपके फिंगरप्रिंट से पैसे नहीं निकाल पाएगा। इसके साथ ही, किसी भी संदिग्ध गतिविधि की शिकायत सीधे सरकारी साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर दर्ज कराएं।

अगर आपको यह जानकारी मददगार लगी हो, तो इसे अपने करीबी लोगों के साथ शेयर करना बिल्कुल न भूलें। खुद भी सतर्क रहें और अपनों का डिजिटल डेटा भी सुरक्षित रखें!

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अस्वीकरण (Disclaimer): यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से लिखा गया है। Wah Times News किसी भी तरह की अवैध ऑनलाइन गतिविधि या डार्क वेब के उपयोग का समर्थन नहीं करता है। अपनी निजी जानकारी और वित्तीय डेटा की सुरक्षा हमेशा स्वयं सुनिश्चित करें। 

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